“एक दिन था, सोचता था, जाऊंगा मैं नभ के पार, थे स्वप्न आँखों में संजोए स्वयं पर किया था ऐतबार, पंखों को फैलाकरके अपने, उड़ना शुरू जैसे किया, एक झोंका आया जोर का मैं लड़खड़ा नीचे गिरा, था सोचता देगा सहारा कोई तो, समझेगा इस बात को, इस बार ना उड़ सका, पर उडूँगा मैं एक [...]






